JGM Facilities

1. प्राकृतिक क्षेत्रः- जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम  पूर्णतः प्राकृतिक , प्रदूषण मुक्त, शुद्ध, सात्विक, वातावरण में स्थित है। परिसर के चारों ओर प्राकृतिक हरियाली युक्त वातावरण है। धुंआ व ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने वाले कारखानों तथा गाँव बस्ती के शोर से दूर शान्तिपूर्ण वातावरण में स्थित है।

2. आध्यात्मिक क्षेत्रः- जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम अध्यात्म से परिपूर्ण है। चामुण्डा माता व बीजासन माता के दिव्य स्थलों के मध्य स्थित है भगवान शिव भोले बाबा का दिव्य स्थान ‘‘साण्डेश्वर महादेव जी’’ के सानिध्य के कारण परिसर पूर्णतः सात्विक व पवित्र भावों से युक्त है।

3. वृक्षों की श्रृंखलाः- जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम के आसपास के परिसर में अत्यधिक वृक्ष होने के कारण चारों तरफ वातावरण स्वच्छ, शुद्ध है तथा पूर्णतः प्रदूषण मुक्त है। गुरुकुल परिसर के आस-पास लगभग 100 से भी अधिक प्रकार के औषधीय गुणों से युक्त वृक्षों की श्रंृखला  है जैसेः- नीम, बबूल, पीपल, बरगद, खेजड़ी, बिल्व व पारिजात इत्यादि।

4. दिव्य पहाड़ः-जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम के निकट दिव्य पहाड़ों की श्रृंखला है, जिससे यहाँ का सौन्दर्य बहुत अद्भुत तथा आकर्षक है।

5. गुरूकुल तक पहुँचने की सुविधाएँ- स्टेट हाईवे पर स्थित है तथा नेशनल हाईवे से मात्र 10 कि.मी. की दूरी, अन्र्तराष्ट्रीय  हवाई अड्डे से मात्र 45 कि.मी. की दूरी तथा रेलवे स्टेशन से मात्र 25 कि.मी. की दूरी पर स्थित है अर्थात् गुरुकुल तक पहुँचने में किसी को किसी भी प्रकार की असुविधा ना हो, इसकी पूरी व्यवस्था है।

 

गुरुकुल के विद्यार्थियों के लिए अति आवश्यक व्यवस्थाएँ

           हमारा उद्देश्य यह है कि जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम में पढ़ने वाले विद्यार्थी 95-97 प्रतिशत अंक प्राप्त करें परन्तु सिर्फ और सिर्फ किताबी कीड़ा न बनकर रह जाएं।  विद्यार्थी की शिक्षा बहुआयामी होनी चाहिए। हर प्रकार का ज्ञान व जानकारी विद्यार्थियों को होनी चाहिए। भारतीय प्राचीन गुरुकुलीय शिक्षा तो हम बच्चों को दें ही परन्तु , आधुनिक परिवेश से भी बच्चों को परिचित करवायें। विद्यार्थी संस्कृत का श्लोक बोलें, तो कम्प्यूटर चलाने का भी उसे ज्ञान हो। विद्यार्थी को हिन्दी आए, तो अंग्रेजी बोलने में भी वो पीछे  ना रहे। 

 ‘हम प्राचीन गुरूकुलीय शिक्षा को छोड़ें नहीं।
और आधुनिक शिक्षा से मुख मोड़ंे नहीं।।’’

        जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम में अध्ययनरत विद्यार्थी को प्राचीन व आधुनिक शिक्षा प्रणाली का समावेशित ज्ञान व संस्कार प्राप्त हो, इसके लिए जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम प्रांगण में विद्यार्थियों को निम्न सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएगी।

 

1.निवास सम्बन्धित व्यवस्थाएँ

 

पंचगव्य से निर्मित आवासः- जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम में विद्यार्थियों के निवास के लिए आधुनिक व प्राचीन संस्कृति की मिश्रित सुख सुविधाओं से युक्त वातानुकूलित पंचगव्य से निर्मित छात्रावास का निर्माण किया गया है।  देशी गौमाता के दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र  को शुद्ध मिट्टी में मिलाकर उसके द्वारा छात्रावास की दीवारों का निर्माण हुआ है। जैसा गुरुकुल भगवान श्री रामचन्द्र जी तथा भगवान श्री कृष्ण के काल में था, उसी प्रकार का वातावरण आज के विद्यार्थियों को मिले, इसी उद्देश्य से इस पंचगव्य आवास की व्यवस्था की गई है।  इस आवास के कई लाभ हंै जैसेः- 

        (1) पंचगव्य से निर्मित यह कक्ष पूरी तरह से वातानुकूलित है। सर्दी में अधिक सर्दी, गर्मी में अधिक गर्मी का अहसास नहीं होगा। इससे सर्दी, गर्मी व वर्षा के कारण किसी भी तरह का व्यवधान विद्याध्ययन  में नहीं होगा।

         (2)  वैज्ञानिक कहते हंै कि हमारे मोबाईल व टेलीफोन टाॅवर से रेडिएशन निकलती है, वो हमारे शरीर के लिए हानिकारक होती है, और कई रोगों को उत्पन्न करती है। पंचगव्य उन रेडिएशन को अपने भीतर प्रवेश नहीं करने देता है। इसलिये इस कक्ष में निवास करने वाले विद्यार्थी इस रेडिएशन से सुरक्षित रहेंगंे।

         (3)  हमारे जीवन में आहार व विहार का बड़ा महत्व है हम जहाँ निवास करते हैं या अधिकांश समय व्यतीत करते हैं वहाँ के परमाणुओं का हम पर बहुत असर होता है। यदि तामसिक स्थान पर रहेंगें तो तमोगुणी विचार आऐंगें और यदि सात्विक स्थान पर रहेंगें तो सात्विक विचार आएंगें। इसलिए पंचगव्य के कक्ष में निवास करके सात्विक विचारधारा से युक्त होकर के यदि कोई विद्यार्थी सात्विक शिक्षा ग्रहण करेगा तो निश्चित रूप से आगे जाकर के अपने परिवार, समाज व सम्पूर्ण  राष्ट्र का उत्थान करेगा। 

        इसलिए आवास के लिए पंचगव्य निर्मित भवन का निर्माण, विद्यार्थियों के लिए किया गया है। 

 

इसके अतिरिक्त छात्रावास भवन में अन्य और भी व्यवस्थाएँ रहेगी, जैसे कि-

        

        (1) भवन के चारों तरफ सुरक्षा हेतु ऊंची दीवार और तारबन्दी तथा सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था।

         (2)  सम्पूर्ण परिसर की प्रतिदिन 2 बार सफाई ।

         (3)  विद्यार्थी को पीने के लिए शुद्ध सात्विक विधि से फिल्टर शीतल जल ताम्रपात्र एवं मृण घट में उपलब्ध        साथ ही छात्रों के लिए वर्षा जल की व्यवस्था। 

         (4)  विद्यार्थियों की सुरक्षा हेतु सम्पूर्ण परिसर अत्याधुनिक कैमरों से युक्त।

         (5)  सम्पूर्ण परिसर पालीथीन मुक्त।

         (6)  अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त स्वच्छ  विशाल स्नानघर एवं शौचालय।

         (7)  सप्ताह में एक बार विद्यालय परिसर, बिस्तर एवं कपड़ों का प्राकृतिक तरीके (नीम, आकड़ा, धतूरा व कपूर, मिश्रण) से सेनेटाईज किया जायेगा।  ताकि कोरोना वाइरस जैसी महामारियों से विद्यार्थी सुरक्षित रह सकें।

        (8)  छात्रावास के विद्यार्थियों के लिए पोशाक, स्टेशनरी व पुस्तकों की व्यवस्था गुरुकुल की ओर से रहेगी।

                                                                                                                 

 

2.आहार सम्बन्धित व्यवस्थाएँ

 

गौ आधारित कृषिः- विद्यार्थियों के निवास के साथ-साथ उनके आहार पर भी जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम् में विशेष ध्यान दिया जा रहा हैै क्योंकि हमारे धर्मग्रन्थ, हमारे शास्त्र व हमारे बुुजुर्ग यही कहते हंै कि  - 

 

‘‘ जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा तन और मन।’’

 

        यानि कि भोजन का असर हमारे शरीर व मन मस्तिष्क पर पड़ता है। आज भोजन की अशुद्धि के कारण हमारे जीवन की आयु कम हुई है और रोग भी बढ़े हंै। साथ ही साथ समाज में लोगों की हिंसात्मक वृति भी बढ़ी है। आज से कुछ वर्षांे पहले की बात की जाए तो पहले हमारे बुजुर्ग 100-120 वर्ष की आयु पूरी कर लेते थे तथा शरीर में इतने रोग भी नहीं  थे। आज तो 30-40 वर्ष की उम्र में हमारे शरीर में रोग लग जाते हंै तथा 100 साल की उम्र तो कोई विरला ही कर पाता है। यानि रोग बढ़े हंै तथा उम्र घटी है। 

        आज यदि हम समाचार पत्र उठा कर देखें तो उसमें हिंसात्मक कई समाचार नित्य प्राप्त होते हंै, जो आज देश के विभिन्न क्षेंत्रों में हो रहे हंै। 

        इसका मुख्य कारण हमारा अन्न दूशित हो गया है। पहले हमारे बुजुर्ग गौ आधारित कृषि करते थे। खेती का काम बैल भगवान के द्वारा होता था तथा गौमाता और बैल बाबा का गोबर खेती में खाद के रूप में काम आता था, जिससे अन्न में पवित्रता, शुद्धता व सात्विकता थी। आज खेती में ट्रैक्टर का उपयोग होता है तथा केमिकल फर्टीलाईजर यूरिया, डीएपी व पेस्टीसाइड्स का इतना अत्यधिक मात्रा में उपयोग होता है जिससे भोजन की पवित्रता, सात्विकता तो समाप्त हुई ही है परन्तु आज का भोजन एक प्रकार से धीमा जहर बन चुका है। इससे हमारी आध्यात्मिक, बौद्धिक, शारीरिक व मानसिक हानि हो रही है। 

        अतः जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम में पढ़ने वाले विद्यार्थी को इस हानि से बचाने के लिए उत्तम, शुद्ध, सात्विक आहार की प्राप्ति हेतु गौ आधारित खेती की व्यवस्था  गुरुकुलम प्रांगण में ही की गई है। विद्यार्थियों के उपयोग में आने वाले धान, मसाले, फल तथा सब्जियाँ पूर्ण रूप से शुद्ध होगीं क्योंकि इनकी पैदावार के दौरान किसी भी प्रकार के केमिकल जैसे यूरिया, डीएपी व पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल नहीं किया जायेगा। गौमाता के पंचगव्य एवं प्राकृतिक पदार्थो से निर्मित खाद एवं कीट नियंत्रक से उत्पन्न देशी व भारतीय बीजों से की गई कृषि से प्राप्त पूर्ण सात्विक, शुद्ध व सत्वगुण प्रभाव वाले  रसायनमुुक्त अन्न, दालंे, मसाले, तेल व फल आहार में दिये जायेंगंे, जिससे सात्विक आहार लेकर सात्विक विचारधारा से युक्त होकर विद्या ग्रहण कर सकें। 

 

       इसके अलावा भोजन में काम आने वाली प्रत्येक वस्तु पूर्णतः शुद्ध रहे, इसके लिए गुरुकुलम में निम्न विशेष व्यवस्थाएँ की जा रही है जैसेः-

(1)  बैल भगवान द्वारा चलित चक्कीः- जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम के विद्यार्थियों के लिए उपयोग में आने वाला आटा ना तो बाजार से लाया जाएगा, ना ही किसी इलैक्ट्रिक चक्की से पिसवाया जायेगा। बैल भगवान के द्वारा चलित चक्की द्वारा आटा बनेगा, जिससे उसकी पवित्रता और भी बढ़ेगी। बैल भगवान के सानिध्य से अन्न का पाप भी मिट जाएगा तथा भोजन शुद्ध एवं सात्विक होगा।

 

(2)  बैल भगवान द्वारा चलित घाणीः- जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम के विद्यार्थियों को बाजार का मिलावटी व अशुद्ध तेल से बना पकवान नहीं खाना पड़े इसलिये शुद्ध तेल प्राप्त करने हेतु बैल भगवान द्वारा संचालित देशी घाणी के द्वारा शुद्ध मूंगफली, तिल व सरसों का तेल निकाला जायेगा जो विद्यार्थियों के भोजन के लिए इस्तेमाल होगा।

 

(3)  बैल भगवान द्वारा चलित चरखीः- आज के समय में भोजन में जो चीनी-शक्कर हम इस्तेमाल करते हंै, वो पूरी तरह से अशुद्ध है। हमारे बुजुर्ग जो चीनी खाया करते थे, वह तो पीले रंग की होती थी परन्तु आज वर्तमान में जो चीनी काम में ली जाती है, उसको सफेद करने के लिये केमिकल का तथा हमारे धर्म को क्षति पहुँचाने वाले अशुद्ध तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है।  इस कारण इसको खाने से हमारी आध्यात्मिक क्षति होती है। इसलिए बाजार की सफेेद चीनी का इस्तेमाल न करके गुरुकुल के विद्यार्थियों के लिए बैल भगवान द्वारा चलने वाली चरखी की व्यवस्था की गई है, इसके द्वारा देशी गुड़ का निर्माण यहीं पर किया जायेगा, जो कि पूर्णतः गौ आधारित और शुद्धता से युक्त होगा।

        इस प्रकार भोजन के माध्यम से किसी भी प्रकार की अशुद्धि बालक के शरीर में ना जाये, इसका पूरा-पूरा ध्यान रखा जाएगा।  हर प्रकार के भोज्य पदार्थ धान्य, फल, सब्जियाँ, दालें, मसालें, तेल व चीनी इत्यादि गुरुकुल के ही प्रांगण में गौ आधारित कृषि व यंत्रों द्वारा निर्मित होगी। 

                                                                                                             

3. गौशाला की व्यवस्थाएँ        

        विद्यार्थी के जीवन में गौमाता की मुख्य भूमिका रहती है एवं गौमाता का शिक्षा में गहन योगदान है। गौमाता की सेवा, गौमाता की परिक्रमा, गौमाता के दर्शन व आरती तथा गौमाता जी का सानिध्य विद्यार्थी को प्राप्त हो सके, इसके लिए जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम प्रांगण में गौशाला का निर्माण किया गया है, जिससे विद्यार्थी को समय-समय पर गौ सेवा, आरती व दर्शन का लाभ मिल सके तथा गोबर की खाद से उत्पन्न रसायन मुक्त घास खाने वाली गौमाता का वैदिक रीति से निकाला हुआ दूध और उसी दूध का वैदिक रीति से बनाया दही, छाछ, घी, मिठाई व पनीर का उपयोग विद्यार्थियों के आहार के रूप में किया जायेगा, जो स्वस्थ तन, मन और बौद्धिक विकास तीनों में उपयोगी है।

        भारत के अधिकांष क्षे़त्रों से विभिन्न नस्लों की देषी गौमाताएँ गौशाला में रहेगीं और उनकी सेवा, सानिध्य का लाभ विद्यार्थियों को प्राप्त होगा।


4. भोजनशाला

 

        जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम में विद्यार्थियों के भोजन निर्माण हेतु हवादार, प्रकाशयुक्त, स्वच्छ तथा सुन्दर स्थान पर गौमाता के गोबर के लेपन द्वारा सुन्दर भोजनशाला का निर्माण किया गया है, जिसमें विद्यार्थी के लिए आहार निर्माण होगा। भोजन का निर्माण गोबर के कण्डे, गोबर गैस, प्राकृतिक गैस, कोयला एवं वन क्षेत्र से प्राप्त शुष्क लकड़ी से होगा। भोजनशाला में भोजन निर्माण में काम में आने वाले बर्तन आयुर्वेद के अनुसार मान्यता प्राप्त स्वास्थ्यवर्धक मिट्टी, लोहा, कांसा व ताम्बा इत्यादि के ही रहेंगे। एल्यूमिनियम के पात्रों का उपयोग बिल्कुल भी नहीं किया जाएगा क्योंकि ये शरीर के लिए हानिकारक हैं। 

        इसके अलावा सर्दियों में समय-समय पर खजूर, तिलपट्टी, तिलयुक्त गजक, मेथी के लड्डू और सूखे मेवे, गोंद के लड्डू जैसी खाद्य सामग्री नाश्ते में दी जायेगी। गर्मियों में चैत्री गुलाब का शरबत, परम्परागत ठण्डाई, नींबू पानी, नारियल पानी, जलजीरा, पोदीना शरबत, श्रीखण्ड व लस्सी जैसे पेय पदार्थ दिये जायेंगें।

        

        जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम के विद्यार्थियों को प्रातः विभिन्न प्रकार का स्वादिष्ट नाश्ता और मसाला दूध, दोपहर में विशेष भोजन, तीसरे पहर में ज्यूस, शरबत व लस्सी आदि तथा सांयकाल में विशेष स्वास्थ्यवर्धक भोजन एवं रात्रि में विशेष औषधि युक्त गौदूग्ध प्रतिदिन दिया जायेगा। 

 

विद्यार्थियों के लिये अन्य व्यवस्थाएँ 

 विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो, इसके लिए विद्यालय में अन्य गतिविधियाँ भी करवाई जाएगीं, जो निम्न हैं -        

1. गुरुकुलम के विद्यार्थियों को नृत्य (क्ंदबम) एवं संगीत (डनेपब) की शिक्षा भी दी जाएगी।

2. गुरुकुलम के विद्यार्थियों को घुड़सवारी (भ्वतेम तपकपदह) तथा तैराकी (ैूपउउपदह) भी सिखाई जाएगी।

3. सभी विद्यार्थियों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए नियमित योग एवं प्राणायाम करवाए जाएँगे।

4. विद्यार्थियों को सभी प्रकार के खेल (ैचवतजे) तथा जूड़ो-कराटे इत्यादि का अभ्यास कराया जाएगा।

5. विद्यार्थियों को उनकी उम्र के अनुसार कार चलाना (क्तपअपदह) और साइकिल चलाना  (ब्लबसपदह) सिखाया जाएगा।

6. सात्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नियमित प्रतियोगिता का आयोजन होगा।

7. प्रतिदिन अतिरिक्त कक्षाओं में अध्ययन की व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए रहेगी।

8. विद्यार्थियों को विशेष बिन्दू लिखने के लिए गोबर पुस्तिका प्रदान की जाएगी।

9.समय-समय पर विश्व स्तरीय खिलाड़ी, वैज्ञानिक, आचार्य, मोटिवेशनल स्पीकर इत्यादि विद्यार्थियों एवं अध्यापकों से सम्भाषण करेंगे।

10. विद्यार्थी भविष्य में सभी क्षे़त्रों में सफल हों, इस हेतु प्रायोगिक रूप से समय-समय पर व्यावसायिक शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जायेगा।

11. विद्यार्थी को बचपन से ही जीरो बजट गौ आधारित कृशि एवं पंचगव्य चिकित्सा का प्रारम्भिक प्रषिक्षण दिया जाएगा।

12. प्राचीन वैदिक शिक्षा, माध्यमिक पौराणिक शिक्षा, आधुनिक तकनीकी एवं सम-सामयिक शिक्षा का संगत रहेगा।

13. सतोगुणी, परम्परागत एवं आधुनिक शिक्षा में पारंगत और व्यसन मुक्त 24 घंटे परिसर में रहने वाले अध्यापक एवं स्टाफ रहेगा।

14. विद्यार्थी आचार्यांे जैसी संस्कृत, विद्वानों जैसी हिन्दी एवं अंग्रेजी बोले इसके लिए भारतीय भाषाओं के साथ अन्तर्राष्ट्रीय भाषाओं का ज्ञान भी दिया जायेगा।

15. आधुनिक अभियान्त्रिक एवं कम्प्यूटर शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा भी दी जायेगी।

16. विद्यार्थियों को प्रारम्भ से ही प्रतियोगिता परीक्षाओं की प्रारम्भिक तैयारी करवाई जायेगी।

17. विद्यार्थियों को स्मार्ट कक्षा  (क्पहपजंस बसंेेमे)  के माध्यम से अध्ययन करवाया जायेगा।

18. विद्यार्थियों के लिए सभी प्रकार के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, ऐतिहासिक एवं साहित्यिक पुस्तकों से समृद्ध पुस्तकालय तथा वाचनालय की सुविधा रहेगी।

19. विद्यार्थियों के लिये आधुनिक सुविधा से युक्त प्रयोगशाला की व्यवस्था रहेगी।

20. जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम के बच्चों को वर्ष में एक बार आध्यात्मिक भ्रमण, तीर्थ स्थान और ऐतिहासिक स्थल पर भ्रमण करवाया जायेगा।

21. समय-समय पर बच्चों का चिकित्सा परीक्षण करवाया जायेगा।

22. भोजन बनाने हेतु अनुभवी व सतोगुणी, व्यसन मुक्त पाक शास्त्रियों की टीम की व्यवस्था होगी।

23. जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम में प्रातः विभिन्न प्रकार का स्वादिष्ट नाश्ता और मसाला दूध, दोपहर में विशेष भोजन, तीसरे पहर में ज्यूस, शरबत, लस्सी इत्यादि, सांयकाल विशेष स्वास्थ्य वर्धक भोजन एवं रात्रि में विशेष औषधि युक्त गौदुग्ध प्रतिदिन दिया जायेगा।

24. विद्यार्थियों का आध्यात्मिक विकास हो, इसके लिये नियमित रूप से साधना करवायी जाएगी।

25. देवताओं की सतोगुणी शक्तियाँ विद्यार्थियों को प्राप्त हो सके, उसके लिए गौघृत से समय-समय पर गौपुष्टी हवन करवाया जायेगा। 

26.विद्यार्थियों में सत्वगुण जागृति हेतु समय-समय पर किसी सन्त, महापुरुष, साधु-साध्वियों द्वारा सत्संग करवाया जायेगा।

27. बचपन से ही सत्वगुण वृद्धि हेतु प्राणी मात्र की सेवा करने का भाव भरने के लिए विद्यार्थियों द्वारा पक्षियों को दाना व पानी पिलाने की व्यवस्था करवाई जाएगी।

28. स्वच्छ पर्यावरण से सत्वगुण वृद्धि होती है अतः पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए विद्यार्थियांे से पौधारोपण और उनकी नियमित देखभाल करवायी जाएगी।

29. विद्यार्थियों में सात्विक वृद्धि की अभिवृद्धि के लिए नित्य मंत्रोच्चार करवाया जायेगा।

30. स्वस्थ तन और स्वस्थ मन के लिए वैदिक विधि से कृष्णमृतिका स्नान, धवल मृतिका स्नान, गौ झरण स्नान, औषधि स्नान करवाया जायेगा।

    उपयुक्त सभी सुविधायें जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध करवायी जायेगीं, ताकि प्राचीन संस्कृति तथा आधुनिक शिक्षा का सम्मिश्रित ज्ञान विद्यार्थियों को मिले तथा बालक का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, बौद्धिक, व्यवहारिक व आर्थिक सभी प्रकार से विकास हो। हर प्रकार से योग्य व सक्षम बन कर विद्यार्थी अपने माता-पिता, परिवार व समाज का नाम तो रोशन करे ही, साथ ही साथ संपूर्ण राष्ट्र की उन्नति में सहायक होकर अपना योगदान देवें।

 अतः प्रत्येक उन अभिभावकों  से आग्रह है कि - 

1. जो अपने बालक को महान बनाना चाहते हैं।

2. जो अपने बालक को विद्वान बनाना चाहते हंै।

3. जो अपने बालक को आत्म निर्भर बनाना चाहते हंै।

4. जो अपने बालक को सद्गुणी बनाना चाहते हैं।

5. जो अपने बालक को सही मायने में इन्सान बनाना चाहते हैं।

        

        वे सभी अभिभावक जय गौ माता (जेजीएम) गुरुकुलम को सेवा का अवसर प्रदान करें तथा अपने बालकों को इस संस्थान का शिक्षार्थी बनाकर, उनके जीवन के सर्वांगीण विकास में अपना अद्भुत योगदान देवें।

 

‘‘लाइये आपके लाल को इन्सान बना दें

दुनिया पूजे, इतना महान बना दें।’’

        

 

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